Environmental Science (333)
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अभ्यास – 1
लक्ष्य:- एक सामान्य पारितंत्र ( प्रस्तावित / सुझाए गये पर्यावासः तालाब, नदी, ज्वारनदमुख, घास का मैदान, वन और मरुस्थल) का अध्ययन और उस पारितंत्र के जैविक तथा अजैविक घटकों का अध्ययन करना।
एक पारितंत्र अपने स्वयं बनाए रखने वाला तथा स्वनियामक होता है जिसमें जीवधारी एक दूसरे के साथ और अपने पर्यावरण से भी संबधित रहते हैं। तालाब जलीय पारितंत्र का एक अच्छा उदाहरण है। तालाब पारितंत्र का अध्ययन करने का बहुत ही सीधा अर्थ यह है कि कैसे विभिन्न प्रकार के जीव एक दूसरे के साथ और उनकी आपसी निर्भरता से संबंधित है।
उद्देश्य
इस अभ्यास को पूरा कर लेने के बाद, आप–
- किसी भी पारितंत्र के विस्तृत निरीक्षण तथा विशेषकर तालाब पारितंत्र के बारे में जानने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे;
- पारितंत्र के जैविक तथा अजैविक घटकों की पहचान सकेंगे तथा उनका वर्गीकरण कर सकेंगे;
- अजैविक (भौतिक) घटकों का जैविक (सजीव घटकों) पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर पायेंगे;
- तालाब में पाये जाने वाले विविध पौधों और जन्तुओं की पहचान कर सकेंगे और उनकी सूची बना सकेंगे।
आवश्यक सामग्री
- सेची डिस्क
- pH पेपर
- सार्वत्रिक सूचक
- लंबा धागा
- पेननुमा डिजीटल pH मीटर
- माइक्रोस्कोप
- स्लाइड
- कवर स्लिप
- हुक वाली लम्बी छड़ी
- पेंसिल तथा पेपर
विधिः
- तालाब के भौतिक घटकों का अध्ययन करना
- तापमान, प्रकाश तीव्रता, जल का pH, घुली गैसें (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड) भौतिक या अजैविक घटकों में शामिल है।
जल के pH मूल्य का अध्ययन करना
- दोपहर में तालाब में से जल एकत्र कीजिये, जब सूर्य काफी चमकीला हो और उस समय जलीय पौधों की प्रकाश संश्लेषण की दर सर्वाधिक होती है।
- लिये गये नमूने को दो भागों में बाँट लीजिये। नमूने के एक भाग को 24 घंटे के लिए डिब्बे में बंद करके अंधेरे स्थान में रख दीजिये नमूने के दूसरे भाग में से परखनली में 2 ml जल लीजिये। उसमें सार्वत्रिक सूचक की कुछ बूंदें डालिये। परखनली में जो रंग उत्पन्न होता है, उसका रंग सूचक की बोतल में चिपके चार्ट से मिलान कीजिये और उसके pH मान को नोट कर लीजिये।
- 24 घंटे के लिए अंधेरे स्थान में रखे गये नमूने में से 2 ml जल लीजिये और उसकी pH का मान ज्ञान कीजिये और उसे रिकार्ड कीजिए। दोनों प्रेक्षणों की तुलना कीजिये।
2. तालाब के जैविक घटकों का अध्ययन करना
- आप तालाब के किनारे के पास पाये जाने वाले पौधे तथा जन्तुओं को हाथ से निकाल लीजिए (आप दस्तानों का प्रयोग भी कर सकते हो) और उन सभी को पौलीथीन की एक थैली में रख दीजिये। इन सभी को प्रयोगशाला में ले आइये। जहां कही भी आवश्यक हो, माइक्रोस्कोप का प्रयोग कीजिये।
- जल में डूबे हुए पौधों को हुक वाली लंबी छड़ी की सहायता से एकत्रित कीजिए। आप उन सभी जीवों को जिन्हें आपने तालाब से इकट्ठा किया है, चित्र बनाइए।
- चौड़े मुँह की बोतल में पानी को एकत्र करके पादप प्लवकों (शैवाल, प्रोटोजोआ इत्यादि) को एकत्रित कीजिए। स्लाइड पर इस जल की एक बूंद डालकर सूक्ष्मदर्शी के नीचे रखिये। जितना सम्भव हो सके, अनेक प्रकार के जीवों के चित्र बनाइये जिनको आप सूक्ष्मदर्शी से देख पाते है।
अभ्यास – 2
लक्ष्य:- प्राकृतिक पर्यावरण के साथ मानव की अन्योन्य क्रिया के प्रभावों का अध्ययन करना।
मानव क्रियाकलापों के कारण पर्यावरण का लगातार होता अवक्रमण एक अत्यंत गंभीर मुददा बन गया है। पर्यावरण से हम जीवित रहने के लिए विविध पदार्थों को लेते हैं। लेकिन पर्यावरणीय संसाधनों का अतिदोहन न केवल संसाधनों की समाप्ति के कारणों के लिए एक गंभीर चुनौती है बल्कि पयार्वरण पर इसके अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ते हैं। यह अभ्यास आपको मानव क्रियाकलापों द्वारा उत्पन्न की गयी भयंकर पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरुकता प्रदान करेगा।
उददेश्यः
इस अभ्यास को पूरा कर लेने के बाद, आप–
- मानव क्रियाकलापों द्वारा पर्यावरणीय अवक्रमण के प्रति जागरुक हो जायेंगे;
- विपरीत प्रभावों को कम करने या उनके दुष्प्रभावों के निराकरण के लिए कार्य योजनाओं के बारे में सोच पायेंगे।
आवश्यक सामग्री
विधि
किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रयुक्त विभिन्न चरणः
- किसी विषय की पहचान करना।
- आप दी गयी सूची में से कोई शीर्षक ले सकते हैं या फिर कोई अन्य मुद्दा जो पर्यावरण पर मानव अन्योन्य क्रिया के प्रभावों से संबंधित हो। आप शीर्षक के चुनाव के लिए अपने मित्रों या फिर अपने अध्यापक से विचार विमर्श करें और फिर चुनें।
- योजना बनाना तथा उसका प्रस्तुतीकरण।
- समयावधि निर्धारित करना।
- डाटा एकत्रित करना। उसे रिकार्ड करना।
- प्रासंगिक क्रम में डाटा को व्यवस्थित करना।
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट लिखना। निम्नलिखित चरणों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट लिखने में शामिल कीजिए:
- परिचय / भूमिका :- शीर्षक का परिचय और उसकी सार्थकता
- उद्देश्य :- प्रोजेक्ट के उददेश्य।
- आवश्यक सामग्री :- नोट्स लिखने के लिए पेन, माइक्रोफोन तथा टेप रिर्काडिंग (वैकल्पिक), बाइनोकुलर (वैकल्पिक), पॉलीथीन थैली, संग्राहक बोतल, जाल।
- विधि :- कार्य क्षेत्र का वर्णन, लोगों के साथ बातचीत, यदि आवश्यक हो तो प्रयोग करें, कोई तकनीक यदि प्रयोग कर सकें, नमूनों का संग्रहण, फोटोग्राफ लें यदि संभव हो।
प्रोजेक्ट के लिए कुछ शीर्षक सुझाये गये हैं। आप उनमें से किसी एक का चयन कर सकते है :-
- किसी तालाब या नदी पर प्रभाव।
- किसी नाले के पास बसी हुयी बस्ती का वास स्थान।
- वनोन्मूलन - जमीन का उपयोग करना।
- वनोन्मूलित क्षेत्रों का सर्वेक्षण।
- जल तालिका पर प्रभाव (और पिछले रिकार्डो के साथ ऐतिहासिक मानों की तुलना करना / या इंटरनेट द्वारा)
- ठोस अपशिष्ट स्थलों पर निपटान का सर्वेक्षण करना।
प्रेक्षण
- वास्तविक डाटा जो आपने एकत्रित किया है उसे तालिका के रूप में, संवाद रूप में या फिर ग्राफ रुप में प्रस्तुत कर सकते है। किसी प्रकार के वर्णन की आवश्यकता नहीं है।
- परिणामों की व्याख्या भी कर सकते हैं, जिसमें अवक्रमण के लिए कारण दिये गये हैं। उन विकासीय गतिविधियों का वर्णन कीजिये जो अवक्रमण के लिए उत्तरदायी हैं।
चर्चा
- आपके प्रेक्षणों की व्याख्या की तुलना उन अध्ययनों से कीजिए जो किसी अखबार या पत्रिका या पुस्तकों में दिया गया हो। आप पर्यावरण संबंधी हानि के विस्तारण के लिए स्वयं के अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं और इस हानि को कम करने के लिए सुझाव भी दे सकते हैं तथा पर्यावरण को संभवतः पुराने स्वरुप में लाने की यदि कोई संभावना हो, तो बता सकते हैं।
- आप सुधार संबंधी उपायों का सुझाव दे सकते हैं। आप इसका भी सुझाव दे सकते हैं कि मानव क्रियाकलापों के पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को कम करने के लिए क्या करना चाहिये या क्या नहीं करना चाहिये।
- कृपया याद रखिये कि यह सबसे जरुरी है कि आप प्रोजेक्ट को समय पर जमा करेंगे।
- क्षतिग्रस्त स्थानों को देखने के लिए दिन के समय और समूह में जाने की कोशिश करनी चाहिये।
- भरपूर नोट (जानकारी) लें, यह काफी महत्वपूर्ण होगा जब आप अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट को तैयार करेंगे।
- शिक्षार्थियों को प्रोजेक्ट के चयन तथा प्रोजेक्ट रिपोर्ट लिखने में मदद एवं गाइड करें।
अभ्यास – 3
लक्ष्य :- किसी क्षेत्र में वनस्पति, पक्षियों, कीटों तथा अन्य जीवों का सर्वेक्षण करना।
हम मानव अपने इस स्थान को, जहाँ हम रहते हैं, विविध पौधों और जन्तुओं के साथ बांटते है। उनमें से सभी हमारे पर्यावरण को स्वस्थ एवं सुखद बनाने में कुछ न कुछ योगदान अवश्य करते हैं। उन सभी के बारे में यह जानना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वे हमारे बहुमूल्य साथी हैं।
उद्देश्य
इस अभ्यास को पूरा कर लेने के बाद, आप–
- जैवविविधता का महत्त्व समझ सकेंगे;
- कुछ पौधों, पक्षियों, कीटों और जन्तुओं की पहचान कर सकेंगे।
आवश्यक सामग्री विधि
- यदि आप किसी स्थान पर घूम रहे हों या फिर आप अपने कार्य क्षेत्र पर गये हों तो वहां पर पाये जाने वाले सामान्य पौधों, पक्षियों, कीटों और अन्य जन्तुओं को देखिए। आप विशेषकर इस काम के लिए अपने पड़ोस के पार्क / वन / पहाड़ / तालाब पर घूमने जा सकते हैं। एक फाइल तैयार कीजिये और फोटोग्राफ के साथ-साथ एक स्क्रेप बुक / चित्र / ड्राइंग / प्रेस किये या एकत्र किये गये कम से कम तीन पौधे (शाक, झाड़ी, पेड़), 3 पक्षी, 3 कीट और 3 अन्य जन्तुओं को एकत्रित कर सकते हैं। आप अपने प्रेक्षणों को नीचे दिये गये प्रारूप में रिकार्ड कर सकते है या फिर अपने प्रेक्षणों को अपनी इच्छानुसार किसी अन्य तरीके से भी प्रस्तुत कर सकते हैं ।
अभ्यास – 4
लक्ष्य :- अपने आस-पास से सामान्य वृक्षों / पौधों की पांच प्रजातियों का चयन करना और उनके सामान्य नामों की सूची तैयार करना। प्रत्येक पौधे को उनकी ऊँचाई और पत्तियों के संदर्भ में वर्णन करना।
पौधे हमारे पर्यावरण के सबसे अधिक प्रत्यक्ष घटक है, हमें अपने चारों ओर अनेक प्रकार के पेड़ – पौधे दिखायी देते है जैसे :- वृक्षः बड़े-बड़े पेड़ जिनके तने सीधे होते है, जो बिना किसी सहारे के खड़े रहते हैं। झाड़ियां मध्यम ऊँचाई की झाड़ियां जिनकी शाखाएं उसके आधार से एकदम सटी होती हैं और शाक-छोटे पौधे होते हैं जिनके कोमल तने होते हैं जो अक्सर विशेष मौसम में पाये जाते हैं। हो सकता है कि किसी को ऊँचाई पर बने हुए क्षेत्र के छोटे-छोटे पौधे, मॉस, घास तथा अन्य छोटी खरपतवार के रुप में प्राप्त हों। सजावटी और गमलों में लगे अन्य पौधे भी घरों के अन्दर पाये जाते हैं। इन पौधों / वृक्षों का अध्ययन हमें पादप जगत की जैवविविधता को समझने में मदद करता है और इसकी विशिष्टिताएं और महत्त्व को समझने में सहायता करता है।
उद्देश्य
इस अभ्यास को पूरा कर लेने के बाद, आप–
- किसी क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न पौधों की सूची बना सकेंगे;
- किसी क्षेत्र में पाये जाने वाले पौधों के महत्त्वपूर्ण लक्षणों के बारे में जान सकेंगे;
- प्रत्येक पेड़ की उसकी ऊँचाई, तने का आकार और पत्तियों के आकार के आधार पर पहचान कर सकेंगे;
- पादप जैव विविधता का महत्त्व बता पायेंगे।
आपको क्या जानकारी होनी चाहिये
- शाक, झाड़ी और पेड़ के बीच अंतर पता होना चाहिये।
- पेड़ों की ऊँचाई नापने की तकनीक।
- किसी भी क्षेत्र के सबसे ज्यादा सामान्य पौधों के सामान्य नामों का पता होना चाहिये।
- ट्रेसिंग तकनीकः कागज़ की सफेद शीट पर पत्ती रख दीजिये या फिर अपनी नोट बुक पर रख दीजिये चित्र में दिखाये अनुसार उसे स्थान पर रखिये
पेंसिल की टिप को साइड पर रखकर और पत्ती के उस भाग को रगड़िए (याद रखिये कि इस प्रयोग के लिए सॉफ्ट पेंसिल का प्रयोग करते है)
पत्ती पर दिखायी देने वाली इन लाइनों को शिरायें कहते हैं। शिरा का प्रेक्षण कीजिए।
यह समान्तर या फिर जालिकारुपी हो सकती हैं (वैकल्पिक)
आवश्यक सामग्री
अभ्यास कैसे आरंभ किया जाये
(i) किसी उपयुक्त क्षेत्र का अपने फील्ड वर्क के लिए चयन करें।
यह आपका स्कूल परिसर या आपकी बस्ती या फिर अन्य स्थानों पर जहां पर काफी बड़ी संख्या में पेड़ पाये जाते हो।
(ii) किसी एक पौधे का चयन कीजिये। उसका सामान्य नाप भी लिखिये।
(iii) पौधे के भागों का ध्यानपूर्वक प्रेक्षण कीजिए।
(iv) पत्ती का प्रिंट और इसकी छाल का भी एक प्रिंट ले लीजिये।
(v) पौधे की ऊँचाई को माप लीजिए। ऊंचें पेड़ की ऊँचाई मापने के लिए आप निम्नलिखित प्रयोग विधियों में से किसी एक का प्रयोग कर सकते है।








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