NIOS Class 10th Science and Technology (212) Solved Practical File Hindi Medium 2022-23

विज्ञान और प्रौद्योगिकी (212) प्रैक्टिकल फाइल

Nios Class 10th Science and Technology Practical File in Hindi Medium

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प्रयोग – 1

दो बिंदुओं के बीच, इधर से उधर चलते / दौड़ते व्यक्ति की औसत - चाल ज्ञात करना।

उद्देश्य:-

इस प्रयोग को करने के पश्चात आप -

  • किसी गतिमान वस्तु द्वारा चलित दूरी माप सकेंगे;
  • विराम घड़ी का उपयोग करके किसी घटना के घटित होने में लगा समय माप सकेंगे; और।
  • किसी दिए गए समय अंतराल में गतिमान वस्तु की औसत चाल ज्ञात कर सकेंगे।
आपको क्या जानना चाहिए:-

चाल वह भौतिक राशि है, जो हमें यह बताती है कि दो बिंदुओं के बीच कोई पिंड कितना तेज चला। लंबी दूरी तय करने में आमतौर पर कोई वस्तु बराबर तेज नहीं चल पाती । दिए गए समय अंतराल में वस्तु की औसत चाल के लिए सूत्र है:

आपको क्या जानना चाहिए

आवश्यक सामग्री:-
एक मीटर पैमाना एवं एक विराम घड़ी 

प्रयोग कैसे करें:-

  1. मैदान में दो निशान A एवं B लगाइए जिनके बीच की दूरी कम-से-कम 20 मीटर हो
  2. अपने किसी मित्र को इनमें से एक बिंदु (माना A) पर खड़ा होने दें जो आपके “चलो” कहने पर तुरंत चलने और A से B और B से वापस A तक चलकर / दौड़कर 5-10 चक्कर लगाने के लिए तैयार हो ।
  3. “चलो” बोलिए और साथ ही विराम घड़ी चालू कर दीजिए (विराम घड़ी न मिले तो अपनी कलाई घड़ी की सेकंड वाली सूई का इस्तेमाल समय नोट करने के लिए कर सकते हैं) जाहिर है, इसके साथ ही आपका मित्र भी चलना शुरू कर देगा (चित्र)।
  4. गिनते रहिए कि आपका मित्र कितनी बार इन बिंदुओं के बीच चला है।
  5. जैसे ही वह अपना आखिरी ट्रिप (AB या BA) पूरा करे "रूको " बोलिए और जिस क्षण वह अंकित चिह्न पर पहुंचता है, विराम घड़ी बंद कर दीजिए।
  6. मीटर पैमाने की सहायता से दूरी AB नापिए।

सीधे रास्ते पर बिंदुओं A व B के मध्य दौड़ता आदमी
चित्र : सीधे रास्ते पर बिंदुओं A व B के मध्य दौड़ता आदमी

7. यदि आपके मित्र ने दूरी AB, n बार तय की है, तो उसके द्वारा चलित कुल दूरी n AB है।

8. अपनी विराम-घड़ी द्वारा इस दूरी को चलने में लगा समय नोट करके औसत चाल की गणना कीजिए। 
9. इस प्रयोग को कम-से-कम तीन बार दोहराइए। क्या तीनों बार आपको एक ही परिणाम प्राप्त होता है ? इनका औसत ज्ञात कीजिए।
10. उन्हीं दो निशानों के बीच आपका मित्र दौड़े और आप यह प्रयोग दोहराएं।
(टिप्पणी : आप स्वयं विराम घड़ी हाथ में लेकर बिंदुओं A एवं B के बीच दौड़ / चल सकते हैं और अपनी औसत चाल ज्ञात कर सकते हैं) 

प्रयोग – 2

दो कमानीदार तुलाओं का उपयोग करके गति के तीसरे नियम का सत्यापन करना। 
उद्देश्य:- 
इस प्रयोग को करने के पश्चात आप -
  • यह दिखा सकेंगे कि कमानीदार तुला की कमानी में विस्तार इस पर लगाए गए बल के अनुक्रमानुपाती होता है;
  • दो कमानीदार तुलाओं को आपस में इस प्रकार जोड़ पाएंगे कि किसी एक तुला पर लगाया गया बल दूसरी तुला पर भी लग सके; और।
  • गति के तीसरे नियम का सत्यापन कर पाएंगे। 

आपको क्या जानना चाहिए:- 
  • कमानीदार तुला की बल मापने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
  • कमानीदार तुला के कार्य करने का सिद्धांत है: “एक समान रूप से लिपटी हुई कमानी में होने वाली लम्बाई में वृद्धि तनन बल के अनुक्रमानुपाती होती है।"
  • यदि कमानीदार तुला द्रव्यमान के मात्रक (g या kg) में अंशांकित है, तो भी पाठयांकों को बल के मात्रक ( अर्थात N) में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके लिए द्रव्यमान को उस स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण के मान से गुणा करना होगा।
  • बल दो पिंडों के बीच अन्योन्यक्रिया का परिणाम है। एक पिंड दूसरे पिंड पर जो बल लगाता है उसे क्रिया कहते हैं और दूसरा पिंड पहले पिंड पर जो बल लगाता है, उसे प्रतिक्रिया कहते हैं।
  • न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार, “क्रिया तथा प्रतिक्रिया बल परिमाण में समान होते हैं, दिशा में विपरीत होते हैं और दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।"

आवश्यक सामग्री:-

एक जैसी दो कमानीदार तुलाएं (0-5N), बाट पेटी, एक घर्षणरहित घिरनी, 1N भार ( = 100 ग्राम भार ) का एक हैंगर तथा हैंगर पर रखने के लिए तीन-चार, IN के खांचेदार बाट, एक ऐंठन रहित, द्रव्यमान रहित अवितान्य डोरी और हुक लगा हुआ लकड़ी का एक भारी गुटका।

प्रयोग कैसे करें:-

  1. 0-5 N परास की एक जैसी दो कमानीदार तुलाएं लीजिए।
  2. दोनों कमानीदार तुलाओं का अल्पतमांक ज्ञात कीजिए।
  3. दोनों कमानीदार तुलाओं को ऊर्ध्वाधरतः पकड़िए और देखिए कि क्या उनके संकेतक इसके पैमाने के शून्यांक पर हैं या नहीं। यदि आवश्यकता हो तो संकेतकों को शून्यांक पर समायोजित कीजिए।
  4. लकड़ी के गुटके को मेज के एक किनारे पर और घिरनी को इसके विपरीत किनारे पर इस प्रकार लगाइए कि दोनों सीधी रेखा में रहें और इधर-उधर न हिलें । तुला B को गुटके से जोड़िए एवं A तथा B तुलाओं के हुकों को एक दूसरे में फंसाइए । चित्र 4.1 में दर्शाए अनुसार तुला A के साथ धागा बांधकर इसे घिरनी के ऊपर से ले जाइए और इसके स्वतंत्र सिरे को बाट वाले हैंगर से जोड़िए । इस व्यवस्था में  कमानीदार तुलाएं मेज के ऊपर रहती हैं, धागा इनके समान्तर रहता है तथा घिरनी के दूसरी ओर धागा और बाट स्वतंत्रतापूर्वक और मेज को बगैर छुए लटकता है।

प्रायोगिक व्यवस्था
चित्र : प्रायोगिक व्यवस्था

5. दोनों कमानीदार तुलाओं के पाठ्यांक नोट कीजिए।

6. हैंगर पर एक - एक न्यूटन के भार बढ़ा कर कम से कम तीन पाठयांक और लीजिए।

प्रयोग – 3

बर्फ का गलनांक ज्ञात करना 

उद्देश्य:- 

इस प्रयोग को करने के पश्चात आप - 

  • एक प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करना सीख पाएंगे;
  • बर्फ का गलनांक ज्ञात करने के लिए उपकरण की व्यवस्था कर पाएंगे; और।
  • किसी दिए गए ठोस के लिए, गलनांक एक अभिलाक्षणिक नियत ताप है, इसे प्रदर्शित कर पाएंगे।

आपको क्या जानना चाहिए:- 

  • कोई ठोस अपने संगत द्रव अवस्था में एक नियत, अभिलाक्षणिक ताप पर रूपांतरित होता है जिसे उसका गलनांक कहते हैं।
  • किसी दिए गए पदार्थ के गलनांक और हिमांक के एक ही मान हैं। 
  • जब कोई ठोस अपने गलनांक पर पिघलना आरंभ करता है तो इसका ताप तब तक अचर रहता है जब तक कि पूरा ठोस द्रव अवस्था में नहीं आ जाता है।

वर्फ का गलनांक ज्ञात करने की प्रायोगिक व्यवस्था
चित्र : वर्फ का गलनांक ज्ञात करने की प्रायोगिक व्यवस्था 

प्रयोग – 4

साधारण नमक की दी गई द्रव्यमान संरचना का जलीय विलयन बनाना

उद्देश्य:- 

इस प्रयोग को करने के पश्चात आप - 

  • विलेय को भौतिक तुला पर तोलकर एक ज्ञात सांद्रता का विलयन तैयार करना जान सकेंगे;
  • यदि विलयन में एक विलायक का द्रव्यमान ज्ञात हो, तो उसकी दुव्यमात्रात्मक प्रतिशत की गणना करना जान सकेंगे; और।
  • एक निश्चित मात्रा वाले विलायक में इच्छित द्रव्यमात्रात्मक प्रतिशत संघटक वाले विलयन को बनाने के लिए विलेय की मात्रा की गणना करना जान सकेंगे।

आपको क्या जानना चाहिए:-

पानी को सार्वभौमिक द्रव कहते हैं क्योंकि पानी में बहुत से पदार्थ घुल जाते हैं। जो पदार्थ पानी में घुल जाते हैं, उन्हें पानी में घुलनशील पदार्थ कहते हैं तथा इस विलयन को जलीय विलयन कहते हैं। दो या दो से अधि क पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। जलीय विलयन में घुलनशील पदार्थ को विलेय तथा पानी को विलायक कहते हैं। किसी तापमान पर विभिन्न पदार्थों की विभिन्न मात्राएं एक दी गई पानी की मात्रा में घोले जा सकते हैं। विलेय की विभिन्न मात्राओं को एक निश्चित मात्रा के पानी में घोलकर आप विभिन्न प्रतिशत संरचना का विलयन तैयार कर सकते हैं। विलेय की मात्रा, विलायक तथा उसकी प्रतिशत संरचना के आपसी संबंध को नीचे दिए गए सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

आपको क्या जानना चाहिए

आवश्यक सामग्री:-

बीकर या काँच का गिलास ( 250mL), साधारण नमक, पानी, काँच की छड़, अंशांकित बेलन, स्पैचुला या चम्मच, भौतिक तुला, भार बॉक्स, पैट्रीडिश, चिकना कागज। 

प्रयोग कैसे करें:-

(i) एक साफ बीकर या काँच का गिलास लीजिए।

(ii) एक चिकने कागज पर 5 ग्राम नमक तोलिए।

(iii) बीकर या काँच के गिलास पदार्थ (ठोस) को डालिए और सुनिश्चित कीजिए कि ठोस पदार्थ का थोड़ा सा भी भाग चिकने कागज पर छूटा नहीं है। 

(iv) अंशाकित बेलन की मदद से 45 ml पानी मापिए। 

(v) पानी को ठोस पदार्थ वाले बीकर या काँच के गिलास में डालिए।

(vi) बीकर या काँच के गिलास में रखी सामग्री को तब तक हिलाएं, जब तक कि पूरा ठोस पदार्थ घुल न जाए (चित्र)।

नमक और पानी का समांगी मिश्रण का बनना
चित्र : नमक और पानी का समांगी मिश्रण का बनना

(vii) आवश्यक विलयन (150mL 10%) तैयार है।

(viii) विभिन्न सांद्रता का विलयन तैयार करने के लिए इस प्रयोग को दोहराइए।

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